BA 1st Semester Political Science (raajniti shastr, राजनीति शास्त्र) Important Questions
1919 का भारत सरकार अधिनियम
(सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी 2021, शब्द–500)
उत्तर :– भारत सरकार अधिनियम 1919, यूनाइटेड किंगडम की संसद द्वारा पारित एक अधिनियम था जिसे मांटेग-चेम्सफ़ोर्ड सुधार के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इस अधिनियम के पारित होने के समय लॉर्ड मांटेग भारत सचिव तथा लॉर्ड चेम्सफ़ोर्ड वायसराय थे। सरकार का दावा था कि उस अधिनियम की विशेषता ‘उत्तरदायी शासन की प्रगति’ है। इस अधिनियम को संप्रभु ने 23 दिसम्बर 1919 को स्वीकृत किया था। इसके अनुसार परिषद में 8 से 12 सदस्य ही रहेंगे।
भारत सरकार अधिनियम 1919, के मुख्य बिंदु निम्न है –
(1) इस एक्ट की भूमिका में इस अधिनियम के उद्देश्यों का उल्लेख किया गया। इस एक्ट ने अगस्त 1917 की घोषणा को कानूनी रूप प्रदान किया। इसका प्रमुख उद्देश्य यह था कि भारत को अंग्रेजी साम्राज्य के अधीन उत्तरदायी सरकार प्रदान की जावे।
(2) केन्द्रीय कार्यकारिणी परिषद् में अब भारतीय सदस्यों की संख्या एक के स्थान पर तीन कर दी गई, परन्तु कार्यकारिणी विधान मण्डल के प्रति उत्तरदायी नहीं थी।
(3) केन्द्रीय विधान मण्डल के दो सदन कर दिये गये एक का नाम राज्य परिषद् और दूसरे का नाम विधान सभा रखा। राज्य परिषद में प्रान्तों तथा विशेष हितों तथा वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया जाता था जबकि विधान सभा में सधारण वर्ग के प्रतिनिधि होते थे।
(4) प्रशासकीय विषयों का केन्द्रीय तथा प्रान्तीय विषयों में विभाजन किया गया, रेल, डाकतार, संचार व्यवस्था, यातायात तथा वित्त अर्थात् सम्पूर्ण देशों से सम्बन्धित विषय केन्द्र को सौंपे गये।
(5) भारतीय हितों की रक्षा के लिये लन्दन में भारत सरकार की ओर से एक हाई कमिश्नर की नियुक्ति की गई। इंग्लैण्ड में भारतीय विद्यार्थियों के हितों की रक्षा और मशीनरी आदि के खरीदने के काम इसको सौंपा गया।
(6) प्रान्तीय विधान मण्डलों में एक ही सदन था जिसे विधान परिषद् कहा जाता था। इसके सदस्यों की संख्या में वृद्धि कर दी गई। इनमें 75 प्रतिशत सदस्य निर्वाचित होते थे।
(7) अब निर्वाचन प्रणाली अप्रत्यक्ष न रहकर प्रत्यक्ष हो गई थी। परन्तु इसमें साम्प्रदायिक चुनव पद्धति को और भी अधिक प्रोत्साहन दिया गया। अब सिक्खों को भी अपने प्रतिनिधि अलग भेजने का अधिकार दिया गया।
(8) भारत मंत्री और उसके कर्मचारियों का वेतन अब ब्रिटिश राजस्व से दिया जाने लगा। इस परिषद के सदस्यों की संख्या 8 से बढ़ाकर 10 कर दी गई।
(9) भारतीय मामलों पर भारत मन्त्री का नियन्त्रण कम कर दिया। उसके कुछ अधिकार गवर्नर जनरल और उसकी परिषद को दिये गये।
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