B.A. Home Science Important Question 'प्रोटीन की परिभाषा, स्रोत, कार्य व आवश्यकता'
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Important Question
प्रश्न- प्रोटीन के स्रोत तथा कार्य व आवश्यकता का वर्णन कीजिये।
उत्तर:- प्रोटीन शब्द का ग्रीक में अर्थ है , " प्रधान स्थान ग्रहण करने वाला पदार्थ । प्रोटीन का शरीर में महत्वपूर्ण स्थान है । सभी जीवित पदार्थों में एक पदार्थ उपस्थित रहता है जो कि शरीर के गति को संचालित करता है ! उन्होंने इसका नाम प्रोटीन दिया । प्रोटीन का शरीर में महत्वपूर्ण स्थान है यह शरीर का निर्माण कार्य तथा शरीर के रोगों से रक्षा करता है ।
प्रोटीन के स्त्रोत- प्रोटीन का निर्माण प्रारम्भिक रूप में वनस्पति में ही होता है । वनस्पति भूमि से नाइट्रोजन , जल , हवा , आदि लेकर प्रोटीन का निर्माण करते है तथा अपने बीजों में संग्रह करते है ।
जन्तु जगत से प्राप्त प्रोटीन- मास , पनीर , अण्डा , खोया , दूध , दही , मुर्गा यकृत ।
वनस्पति जगत से प्राप्त प्रोटीन- अनाज , आटा , सोयाबीन , मूंगफली , दालें , बेसन , मटर , चना
प्रोटीन के कार्य- आहरीय प्रोटीन शरीर को अमीनो अम्ल प्रदान करती है जिसके द्वारा नये उत्तक तथा पुराने उत्तक की मरम्मत होती है ।
1. शरीर के निर्माण का कार्य करती है -
अ- शरीर की वृद्धि तथा विकास करना - मानव शरीर की कोशिकाओं द्वारा निर्मित इमारत है । प्रत्येक कोण का जीवन जीवद्रव्य है , जीवद्रव्य में प्रोटीन कोलाहल स्थिति में होता है । इस कारण प्रत्येक कोण के निर्माण में प्रोटीन की आवश्यकता होती है । प्रोटीन की आवश्यकता जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक बनी रहती है। शिशु अवस्था से किशोरावस्था तक विकासकाल रहता है , अतः इन अवस्थाओं में अधिकतम प्रोटीन का समावेश होना चाहिए ।
ब - शरीर में होने वाली तोड़ - फोड़ की मरम्मत- मानव शरीर एक मशीन के समान कार्य करता है । शरीर के बाह्य एवं आन्तरिक अंग निरन्तर कार्यरत रहते है । निरन्तर कार्य करने से कोशिकाओं में तोड़ - फोड़ होती रहती है । नये कोशिकाओं का निर्माण करना तथा पुरानी कोशिकाओं की मरम्मत करना प्रोटीन का काम है
स- शरीर का कोई भाग कट जानें , जल जाने या मुख्य शल्य चिकित्सा में अधिक मात्रा में प्रोटीन की आवश्यकता होती है ।
ड– गर्भवती स्त्री एवं धात्री मात्रा को अपने आहार में अधिक प्रोटीन लेना चाहिए ।
2. प्रोटीन शरीर में उत्पन्न होने वाले एन्जाइम हारमोन्स तथा एण्टीबॉडीज के निर्माण का कार्य करती है -
शरीर में प्रोटीन नाइट्रोजन युक्त कई प्रकार के यौगिक बनाते है । ये यौगिक शरीर की कई रासायनिक क्रियाओं में सहायक होते है । पाचक रस में उपस्थित एन्जाइम , पेप्सीन तथा ट्रिपसीन प्रोटीन युक्त एन्जाइम है , इन एन्जाइमों में नाइट्रोजन भी पायी जाती है । रक्त में उपस्थित गामोग्लोव्यूलिन में प्रोटीन उपस्थित रहता है । यह प्रोटीन रक्त में एण्टीबाडीज बनाती है ।
3. प्रोटीन शरीर में होने वाली विभिन्न क्रियाओं को नियन्त्रित करती है- प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं की बाह्य एवं आन्तरिक क्रियाओं को नियन्त्रित करती है । इसकी कमी होने पर शरीर में पानी जमा हो जाता है तथा शरीर के विभिन्न अंगों पर सूजन आ जाती है ।
4. प्रोटीन शरीर को शक्ति प्रदान करती है- भोजन में श्वेतसार तथा वसा के अतिरिक्त प्रोटीन भी शक्ति प्रदान करने का कार्य करती है । ग्राम प्रोटीन से 4 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है ।
5. प्रोटीन की दैनिक आवश्यकता-
पुरुषो के लिए - 50gm
स्त्रियों के लिए( सामान्य अवस्था) - 50gm
स्त्रियों के लिए ( गर्भावस्था) - 65gm
स्त्रियों के लिए ( दुग्धपान अवस्था) - 50+25gm
शिशु ( जन्म से 6 माह) - 2.05gm
शिशु ( 7 माह से 1 वर्ष तक) - 1.65gm
बालक ( 1 - 3 वर्ष ) - 22gm
बालक ( 4 - 6 वर्ष ) - 30gm
बालक( 7 - 9 वर्ष ) - 41gm
लड़का ( 10 - 12 वर्ष ) - 54gm
लड़की( 10 - 12 वर्ष ) - 57gm
लड़का( 13 - 15 वर्ष ) - 70gm
लड़की ( 13 - 15 वर्ष ) - 65gm
लड़का ( 16 -18 वर्ष ) - 78gm
लड़की ( 16 - 18 वर्ष ) - 63gm
इस प्रोटीन की मात्रा का कम से कम 1/5 वाँ भाग जंतु प्रोटीन से प्राप्त होना चाहिए। सामान्य रूप से 10 - 15% कुल ऊर्जा का भाग प्रोटीन से लेना चाहिए। 50% भाग कार्बहाईड्रेट तथा बचा हुआ भाग वसा से लेना चाहिए।
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